जब ट्रांजिस्टर पर सुनते थे किशोर दा के गाने – वो सुनहरे दिन!

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क्या आपको याद है वो दौर, जब मोबाइल नहीं था, इंटरनेट नहीं था… लेकिन दिलों में गूंजते थे किशोर कुमार की आवाज़ के जादू?
1980 के दशक में एक ट्रांजिस्टर ही हमारी दुनिया हुआ करता था। जैसे ही रेडियो पर “मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू…” की धुन बजती, पूरा मोहल्ला चुप हो जाता। बुज़ुर्ग भी मुस्कुराते, और बच्चे झूमते।

किशोर दा की आवाज़ में वो जादू था, जो सीधे दिल तक पहुंचता था।

🎙️ ट्रांजिस्टर और किशोर दा – एक सुनहरी जोड़ी

ट्रांजिस्टर को हाथ में लेकर छत पर जाना, ऐंटीना को घुमा-घुमा कर सिग्नल पकड़ना… और जैसे ही “पल पल दिल के पास” बजता – वो एहसास आज भी याद है।

रेडियो सिलोन और विविध भारती पर किशोर कुमार के गाने सबसे ज़्यादा डिमांड में रहते थे। कुछ लोगों की सुबह “आज फिर जीने की तमन्ना है” से होती थी, तो कुछ की शाम “छूकर मेरे मन को” से।

🕰️ वो बेफिक्र पल – जब संगीत में खो जाते थे

तब न स्मार्टफोन था, न Spotify… लेकिन जो सुकून था, वो आज के वक्त में नहीं है।
हर रविवार को “बिनाका गीतमाला” सुनना और टॉप 10 गानों में किशोर दा का नाम आना जैसे एक जश्न होता था।

🎤 किशोर कुमार – आवाज़ जो कभी बूढ़ी नहीं होती

उनकी आवाज़ में मासूमियत भी थी और मस्ती भी।
🎵 “एक लड़की भीगी भागी सी…” सुनते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
🎵 “दिल क्या करे जब किसी से…” सुनते ही दिल कहीं खो जाता है।

उनकी गायकी सिर्फ संगीत नहीं, एक एहसास थी।

💭 आज भी दिल कहता है – काश वो दिन लौट आते

आज भले ही हमारे पास हजारों गाने हों, लेकिन किशोर दा के वो कुछ खास गाने – जो ट्रांजिस्टर की धुनों पर दिल में बस गए थे – उन्हें कोई नहीं भुला सकता।

अगर आप भी वो दिन मिस करते हैं, तो इस पोस्ट को ज़रूर शेयर करें।

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